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जाने दो !

जनानो की मर्दानगी ..... क्यों नहीं !

भाषा की ध्वस्त पारिस्थितिकी में अडिग कुंवर नारायण

चुनावी ग़ज़ल

आ गए चुनाव !

लेकिन मेरा लावारिस दिल